मंज़िल का मार्ग है धैर्य- डा. शीशपाल हरडू
मित्रों, धैर्य का हम सामान्य अर्थ आपत्ति व कठिनाई के समय में अपने विवेक से संयंत और सत्यता के साथ व्यवहार और प्रयत्न करना होता है I व्यक्ति के जीवन में अनुकूलता भी आती है और प्रतिकूलता भी परन्तु जो अनुकूलता से राग न करे यानि घमंड न करे व प्रतिकूलता से द्वेष न करे यानि विचलित न हो, दोनों परिस्थितियों में समता का व्यवहार करे वही धैर्यवान पुरुष कहलाता है I प्रकृति मानव को कितना सरल तरीके से समझा रही है समता ही स्थायी है और संयम ही जीवन है I जिस प्रकार ऋतू में परिवर्तन से गर्मी सर्दी व बरसात का मोसम आता है ठीक उसी प्रकार हमारे जीवन में भी कभी ख़ुशी कभी गम तो कभी सामान्य परिस्थिति आती रहती है परन्तु जो हर परिस्थितियों में अपना विवेक खोये बिना अनुकूलता को दीर्घ व प्रतिकूलता को अल्प करने का प्रयत्न करता है वह स्थायी व सच्चे आंनद का हक़दार माना जाता है I जब अनुकूल परिस्थिति यानि सुख स्थायी नहीं रहा तो प्रतिकूल परिस्थिति यानि दुःख भी स्थायी नहीं रह सकता क्योंकि प्रकृति का नियम ही परिवर्तन है I यह बड़ी विडंबना है की जब भी कोई मन की इच्छा पुरी नहीं हुई या इच्छित वस्तु प्राप्त नहीं हुई या आशानुरुप परिणाम नहीं मिला तो हम दुखी हो जाते है, अधीर हो जाते है और विचलित हो जाते है और इसका परिणाम ये होता है की हम आज भी दुःख में व्यतीत कर रहे है व भविष्य भी दुखमय बना रहे है I
इस विषय में कबीरदास जी का दोहा “ज्ञानी काटे ज्ञान से,अज्ञानी काटे रोय, मौत ,बुढ़ापा ,आपदा ,सब काहू को होय “ बहुत ही सार्थक है I जो जन्मा है वो मरेगा भी, बालक जवान भी होगा तो वो बुढा भी होगा, सुख मिला है तो दुःख भी मिलेगा, कभी अनुकूलता होगी तो कभी प्रतिकूलता भी आएगी यानि ये जीवन उतार-चढ़ाव, सुख-दुःख, जीवन-मरण, लाभ-हानि, यश-अपयश का संगम है जो ज्ञानी अतार्थ विवेकशील व धैर्यवान व्यक्ति हालात अनुसार अपना व्यवहार, क्रियाकलाप और प्रयत्न करके अनुकूलता में वृद्धि और प्रतिकूलता में कमी कर सकता है I जो विपरीत परिस्थिति में धैर्य के साथ प्रयत्न करते हुए आगे बढ़ता जाता है इतिहास वही बनाता है I कायरों को उतने से ही संतुष्ट होना पड़ता है जितना धीरवान छोड़ देते है I पशु और मानव में सिर्फ विवेक का ही तो अंतर है वरना भय, भूख, मैथुन और सुख-दुःख का अनुभव तो ये दोनों समान रूप से करते है I विवेक ही हमें परिस्थिति अनुसार अपना व्यवहार करना सिखाता है और धैर्य के साथ मिलकर उन्नति और प्रगति की गाथा लिखता है I इसलिए ज्ञानी अपने ज्ञान से उन परिस्थितियों के अनुरूप कार्य व प्रयत्न करके सहजता व सरलता के साथ जी लेता है और उनको अवसर में बदल लेता है जबकि अज्ञानी उन विपरीत परिस्थितियों से घबरा कर हाथ पर हाथ धरे बैठ कर रोता है और अपना आज के साथ सुनहरा कल भी खोता है I
कबीरदास जी ने धैर्य का महत्व बताते हुए फिर कहा कि “ धीरे रे मना धीरे सब कुछ होय, माली सिंचे सौ घड़ा ऋतू आए फल होय “ यानि एक बीज को अंकुरित होकर पौधा बनने व उस पर फल आने में समय लगता है अतार्थ कोई भी कार्य वक्त से पहले नहीं होता और प्रत्येक कार्य में वक्त लगता है परन्तु इसका मतलब यह नहीं की हम हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाये और कोई प्रयत्न न करें I धैर्य का मतलब यह कदापि नहीं की हम अपना कर्म करना छोड़ दे और भाग्य के भरोसे बैठ जाये I आलसी और काम से जी चुराने वाले को कभी भी कुछ भी नहीं मिल सकता, कुछ पाने के लिए गहरे में उतरना पड़ता है ,किनारे बैठे रहने वाले के नसीब में मोती नहीं मिल सकता I इसलिए जीवन में इस सच्चाई को समझना होगा की लक्ष्य को सफलतापूर्वक पाने के लिए धैर्य से निरंतर प्रयास करना होगा तभी हम वांछित परिणाम प्राप्त कर पायेगे I
आपत्तियां व विपत्तियाँ हमारे धैर्य, विवेक और पुरुषार्थ को चुनौती देने के लिए ही आती है और जो इस परीक्षा में पास हो जाता है वो सफल माना जाता है तथा यश व जीत की जयमाला पहनता है I क्रोध, जल्दबाजी व अविवेकशीलता में किए गए कामों में खामियां रह जाती है या सही निर्णय नहीं लिया जाता और तनाव में विचलित हो जाते है परिणामस्वरूप हम मंज़िल तक नहीं जा सकते और हार, नुकशान व बदनामी का सामना करना पड़ता है I धैर्य वह सवारी है जो अपने सवार को कभी गिरने नहीं देती, न किसी के क़दमों में और न ही किसी की नज़रों में I अत: धैर्य व सहजता से जो कार्य किया जाता है वही सफलता की चोटी को छूता है I धैर्य और विश्वास जीवन की वो कुंजी है जिससे प्रत्येक सफलता का ताला खुलता है , जिसके पास धैर्य है उसके पास दुनिया की तमाम शक्ति है और वह सब कुछ प्राप्त कर सकता है I अत: युवा साथियों, आप भविष्य हो ,आप उर्जा व जोश से लबरेज़ हो, शक्ति व कर्म का पर्याय हो, क्रांति व बदलाव का प्रतीक हो I आज जरूरत है युवा साथियों को धैर्य, संयम, विवेक व सहजतापूर्ण संस्कार, शिक्षा देने की ताकि वे अपनी उर्जा का सकारात्मक उपयोग कर सके और समाज निर्माण में अपनी भूमिका दे सके I भौतिकवाद की दौड़ में विवेकपूर्ण निर्णय ,संयमित व्यवहार व धेर्यपूर्वक कार्य करते हुए जीवन में सफलता को हमराज बनाना होगा I
04/03/2015
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