Monday, 29 December 2014

हरडू शब्द का व्याकरणीय दृष्टी से अर्थ

1.                   हरडू शब्द की संधि (हर +डू ) :
-हर का अर्थ महादेव , अग्नि ,हरने वाला , दूर करने वाला, सकारात्मक रूप से नाश /वध करने वाला ,प्रत्येक ,भाजक ,माली नाम का राक्षस जो विभीषन का मंत्री था ,छप्पय नामक छंद के दसवें भेद का नाम, जो जल्दी ही किसी क्रिया की समाप्ति तक पहुँचने को हो इत्यादि I
शास्त्रों के मिताबिक शिव व शिव नाम सभी पापों को हर लेता है I मन, बुद्धि, विचार,कर्म,वाणी के सारेदोष शिव के हर नाम से नष्ट हो जाते है I दुसरे अर्थ में यह पवित्र शब्द पाप,दोष और दुर्गुणों पर विजय दिलाती है I हर नाम की महिमा यहाँ तक बताई गई है किअगर हर का किसी शब्द में छुपे या स्वर के रूप में उच्चारण हो तो सारे पापों का अंत हो जाता है I
-डू का अर्थ कुछ बोलीओं/ इलाकों में जातियों ,नदियों इत्यादि के नामों के पीछे डा, दा आदि प्रत्यय लगाया जाता है जैसे अलंकनंदा ,शारदा सिलगाड आदि  Iकिसी वस्तु ,शब्द या क्रिया के भावों की उत्कर्ष व्यंजना ,उनके रूप सौन्दर्य या गुण का अनुभव तीव्र करने हेतु अलंकारो का प्रयोग किया जाता है Iइसीप्रकार डू का अर्थ सहमत होना , करना, उपाय करना , रक्षा करना या स्थापित करना के रूप में भी होता है   
2. भारत के कुछ इलाकों में गांवों ,गोत्रों के नाम व्यक्ति ,वृक्ष ,नदी ,जलाशयों ,पशु-पक्षी , घास-फूस या स्थान के नाम से रखे जाते रहे है जैसे पीपल से पिपरिया, बकरी से बकरियावाली,जोधा से जोधपुर ,कुम्पा के वंशज कुम्पवत ,सांगा के वंशज सांगावत कहलाये इसीप्रकार एक बड़ा लम्बा पेड़ जिसका नाम हरदु होता है जो हिमालय में जमुना के पूर्व 3000 फुट तक के ऊँचे तर स्थानों पर पाया जाता है जिसकीछल अंगुल भर मोटीबहुत मुलायम ,खुरदरी और सफेद होती नए तथा इसके भीतर की  लकड़ी मजबूत सख्त कठोर और पीले रंग की होती है व साफ करने पर बहुत चमकती है  जो बंदूक के कुंदे ,कंधियां और नावें बनाने के काम आती है के नाम से सम्भवत: हरडू गोत्र और जम्मू कश्मीर, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में गाँव / शहरो के नाम पड़े हो I    
       3.  हरट्ट पु वि० [सं० हृष्ट] दृढ़ अंगोंवाला। मजबूत। मोटा ताजा। हट्टाकट्टा। हृष्ट पुष्ट। उ०हैबर हरट्ट साजि, गैबर गरट्ट सम, पैदर के ठट्ट फौज जुरी तुरकाने की। भूषण (शब्द०) भी हरट्ट से हरडू शब्द बनने की पुष्टि करता है इसीप्रकार शब्द हरड़ा संज्ञा पुं० [सं० हरीतकी] दे० 'हड़' और 'हर्रा' और हरद पु संज्ञा स्त्री० [सं० हरिद्रा] दे० 'हल्दी'। उ०कनक कलस तोरन मनि जाला। हरद दूब, दधि, अच्छत माला। तुलसी (शब्द०)। इस शब्द की सार्थकता को दर्शाते है
4. हरदू शब्द में अक्षरों की संख्या व्यंजन व मात्र सहित चार है तथा इस शब्द का प्रयोग हिंदी में संज्ञा के रूप में किया जाता है और यह पुलिंग वर्ग में आता है जिसकी उत्पत्ति क्षेत्रीय बोली के कारण शब्द परिवर्तन द्वारा हरडू हुई होI
5. आंग्ल भाषा में Hard/Hardy का अर्थ सख्त मजबूत व कठोर से होता है जो समय के साथ साथ परिवर्तित होकर Hardu बन गया होगा I
6. प्रेमचन्द की कहानी अनुसार बुन्देलखंड में ओरछा नामक राज्य के राजा जुझार सिंह की अनुपस्थिति में उनके छोटे भाई हरदौल सिंह द्वारा जनता से प्रेम –प्यार, न्यायपूर्ण  व प्रजा-वात्सल्य, उदारता व वीरता से लोग राजा जुझार सिंह को भूल कर हरदौल सिंह के मुरीद हो गए I दिल्ली के नामवर तलवारबाज कादिरखां से ओरछा के मुख्य तलवारबाज़ कालदेव व भाल्देव के हार जाने पर हरदौल सिंह ने बुन्देलखंड की आन व शान रखी I राजा जुझार सिंह के वापस आने पर अपने भाई से इर्ष्या और अपनी रानी पर संदेह की आग में हरदौल सिंह को जहरयुक्त पान खिला कर मारना चाहा तो हरदौल सिंह अपनी भाभी के नारीत्व की रक्षा हेतु अपने प्राणों की बलि हंसते हंसते दे दी और हरदौल सिंह के वंशज/अनुयायी हरदौल/हरदो/हरदा/हरदु/हरडू कहलाने लगे I
उपरोक्त सभी साक्ष्यो ,तथ्यों एक बात स्पष्ट होती है की जाट गोत्र में हरडू कद काठी से हष्ट पुष्ट ,लम्बे ,संघर्षशील ,जिद्दी ,न्यायप्रिय , और अपनी आन पर जीने वाले होते है, इसी वहज से ये एक स्थान पर झुण्ड के रूप में नहीं रहते बल्कि अलग अलग जगह पर स्वतंत्र रूप से रहने वाली प्रकृति के लोग है , इस गोत्र की वंश वृदि भी शेरों की भांति काफी कम हुई है लगातार 4-4, 5-5 पीढियां ज्यादातर अकेली ही रही है जबकि जाटों के दुसरे गोत्र में वंश वृदि अपेक्षाकृत ज्यादा रही है I



DESCRIPTION OF GHANTIYAL MEETING

सभी हरडू भाइयों को ये जानकर ख़ुशी होगी की कल हम हमारे कुल गाँव घंटियाल नजदीक श्रीडूंगरगढ़ गए वहा बहुत ही सार्थक सफलता मिली , इसके लिए गाँव घंटियाल निवासी भाई मांगीलाल और वहां के तमाम हरडू भाई बधाई के पात्र है वहां की मुख्य सफलता व चर्चा निम्नलिखितहै :-
1. हरडू गोत्र के कुल भोमिया जो बिदावत राजपूतों के साथ उनके अन्याय पूर्ण कार्यों व गोरक्षा हेतु शहादत देने वाले झुंजारजी दादा की देवली देखी , उनके साथ जो कुता काम आया उसकी समाधी `कुत्ताझाड़` देखी , दोनों ही देव स्थान काफी जर्जर हालात में है ,इससे पहले 7-8 दिसम्बर को गाँव उमादेसर में पांचाजी की लगभग 500वर्ष पुरानी छतरी देखी वो भी काफी जर्जर हो चुकी है I भाइयों कोई भी कौम ,जाति , समाज अपना इतिहास व बुजर्गो की विरासत को संभाले बिना उन्नति करना तो दूर , अपना अस्तित्व बचाए रखना भी मुश्किल हो जाता है ,सो हमें भी अपना इतिहास और ऐतिहासिक विरासत को सहेजना संवारना और उन्नत करना होगा , इस पावन कार्य हेतु आपके सहयोग व सुझावों की आवश्यकता रहेगी , ये कार्य हमारे आगामी मई माह में जोधपुर में प्रस्तावित सम्मेलन का एक एजेंडा रहेगा I
2. हमारे इतिहास का मुख्य स्त्रोत राव यानि बही भाट जो लहभग पिछले 40-45 वर्षो से गायब था को कल ढूंढ लिया गया है जो गाँव गोरीसर तहसील रतनगढ़ में शेराराम पुत्र जैसा राम है और उनकी बहियाँ गाँव लांछडसर निवासी रामुराम के पास है , रामुराम से मेरी बात भी हुई है और अब हमने अपनी विरासत की बहिया लेन का काम हमारे राव शेराराम के साथ घंटियाल से भाई मांगीलाल और कल्याणसर पुराना से भाई भँवराराम को सोंपा है , अगर इस कार्य में इन भाइयों को कोई दिक्कत आती है तो हम सब साथी वहां जाकर इस कार्य को हर हालात में करेंगे और हमारी विरासत हम लायेंगे I
3. हमारे पास लिखित मोखिक कथा कहानी जो भी ऐतिहासिक जानकारी सुनने पढने को मिले या ऑन लाईन /ऑफ लाईन साहित्य मिले कृपया उपलब्ध करवाने का कष्ट करे ताकि उस सब को क्रमवार सही तथ्यों सहित इकट्ठा करके एक पुस्तक /पत्रिका के रूप में सब भाइयों तक पहुंचाई जा सके I
4. हमारे मिलन मिशन का उद्देश्य स्पष्ट है अपनी कौम गोत्र को एक मंच पर लाकर इसका इतिहास व ऐतिहासिक जानकारी को समाज के सामने लाना और समाज में संस्कार, सहयोग , शिक्षा, समृधि और साहस का संचार करना है ,इस मिशन में किसी भी प्रकार की राजनीतिक चर्चा नहीं की जाएगी ,हाँ इतना जरुर है की अगर कोई हरडू भाई चुनाव लड़ता है तो हमारा नेतिक फर्ज़ बनता है की हम उस भाई को समर्थन दें 
5 . सभी भाइयों से अनुरोध की वे अपने सकारात्मक सुझाव जरुर साँझा करें ताकि मिशन को और गति मिल सकें 
6. इस सभा में घंटियाल ,रिड़ी कल्याणसर पुराना छीला भल्लासरिया खेतासर और कुमथल के लगभग 30-35 भाइयों ने भाग लिया 
सभा का समापन धन्यवाद प्रस्ताव व पुन: मिलन की कामना के साथ हुआ