भगवान गणेश एक आदर्श शिक्षक : डा. शीशपाल हरडू
भगवान गणेश बुद्धि के देवता है इसीलिए कोई भी कार्य प्रारम्भ करने से
पूर्व सबसे पहले गणपति की पूजा की जाती है ताकि बुद्धि व विवेक का कुशलतापूर्वक
उपयोग करते हुए कार्य, लक्ष्य, उद्देश्य तथा मंज़िल निर्विघ्न रूप से प्राप्त कर
सके I भगवान गणेश ही एकमात्र ऐसे देवता है जो आध्यात्मिक दृष्टि से तो पूज्यनीय,
वन्दनीय है ही परन्तु व्यवहारिक जीवन में भी इनका हर अंग, हर रूप हमें कोई न कोई
नई शिक्षा देता है और जीवन जीने की कला व सलीका सिखाता है और एक सफल इन्सान की
विशेषता बताता है I आइये जाने कि भगवान गणेश हमें क्या क्या शिक्षा दे रहे है :
1. बड़ा सिर बड़े दिमाग, बड़ी बुद्धि का प्रतीक है क्योंकि
आपको सोचने, चिंतन करने, विचारने, याद रखने के लिए हमें हमेशा अपना दिमाग खुला व
विस्तृत, तीव्र व तेज़ बुद्धि रखनी होगी और संकीर्ण व छोटी सोच का त्याग करना होगा,
तभी हम प्रतिस्पर्धा के युग में सफल हो पाएंगे I
2. लम्बी
सूंड यानि बड़ी नाक हमारी दूरदर्शिता व इज्जत का प्रतीक है जो कहना चाहती है
परिस्थितियों व हालात को समय रहते दूर से ही सूंघ कर अनुमान लगाकर उसके अनुसार
अपनी योजना अपनी व्युरचना बना कर नुकशान को मुनाफ़े में बदल सके I नाक इज्जत व
सम्मान का भी सूचक है I
3. छोटी व झुकी आँखें हमारे नजरिये व दृष्टिकोण की
और इशारा करती है कि हर बात व हर वस्तु पर बारीकी से नजर रखो और किसी को छोटा मत
समझो I झुकी आँखे कहती है की कभी भी किसी बात का घमंड मत करो , अभिमान का त्याग
करो और हर एक का सम्मान करो I
4. बड़े कान संदेश दे रहे है की आप अपने से जुड़े हर
व्यक्ति की सुनो, क्या पता कौन आपको कोई महत्वपूर्ण सलाह या जानकारी दे दे जो आपके
लिए राह आसान बना दे I इसलिए सुनो सब की करो मन की I
5. बड़ा पेट कह रहा है कि आप अपनी योजनाओं को, अपनी
बातों को, अपनी गुप्त व आवश्यक बातों व मुद्दों को अपने पेट में ही रखे , हर किसी
के साथ उनको साँझा न करें, गुप्त बातों को पचाना सीखो I
6. गणपति का वाहन चूहा दो सन्देश दे रहा है कि जो
आपके पास है उससे संतोष करो और मितव्ययी बनो और दूसरा ये किबुद्धि कितनी भी बड़ी व
तेज़ हो परन्तु उसे चलाने के लिए तर्क की जरूरत होती है, तभी तो गणपति इतने बड़े और
वाहन चूहा इतना छोटा मगर अपनी बुद्धि व तर्क से हर कार्य करने में समर्थ I बुद्धि, अक्ल व ज्ञान वही सफल व कारगर होता है
जिसके पास सही व स्पष्ट तर्क हो, हो चाहे छोटा मगर होना सटीक चाहिए I
7. भगवान गणेश की पत्नियाँ रिद्धि-सिद्धि हमारी
कार्यकुशलता व कार्यक्षमता की प्रतीक है I हम अपनी कार्यकुशलता में वृद्धि करे और
उसे सहेज कर बरकरार रखें तथा प्रशिक्षण व व्यवहार से अपनी कार्यक्षमता को हमेशा
बनाये रखें I
8. भगवान गणेश के पुत्र योग व क्षेम है जिनका अर्थ
योग यानि जोड़ अतार्थ कार्यकुशलता व कार्यक्षमता में वृद्धि करते हुए आर्थिक लाभ को
जोड़े और उसमें वृद्धि करें तथा क्षेम का अर्थ सुरक्षित रहने से है यानि जो आर्थिक
लाभ कमाया गया है वो सुरक्षित, स्थिर व स्थायी रूप में रखने हेतु बुद्धि का प्रयोग
करें I
13/04/2015
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